श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  2.16.43 
सिंह - द्वार - निकटे आइला शुनि’ गौरराय ।
आपने आसिया प्रभु मिलिला सबाय ॥43॥
 
 
अनुवाद
जब भक्तगण अंततः सिंहद्वार पर पहुँचे, तो श्री चैतन्य महाप्रभु ने समाचार सुना और स्वयं उनसे मिलने गए।
 
When the devotees reached the Lion Gate, Sri Chaitanya Mahaprabhu heard the news and went to meet them himself.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)