श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  2.16.4 
सार्वभौम, रामानन्द, आनि’ दुइ जन ।
दुँहाके कहेन राजा विनय - वचन ॥4॥
 
 
अनुवाद
इसलिए राजा ने सार्वभौम भट्टाचार्य और रामानन्द राय को बुलाया और उनसे निम्नलिखित विनम्र शब्द कहे।
 
Therefore the king sent for Sarvabhauma Bhattacharya and Ramanand Rai and spoke to them politely.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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