श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  2.16.39 
दुइ माला गोविन्द दुइ - जने पराइल ।
अद्वैत, अवधूत - गोसाञि बड़ सुख पाइल ॥39॥
 
 
अनुवाद
गोविंदा ने अद्वैत आचार्य और नित्यानंद प्रभु को दो मालाएं अर्पित कीं, और वे दोनों बहुत खुश हुए।
 
Govind presented both those garlands to Advaita Acharya and Nityananda Prabhu. This made both of them very happy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)