श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  2.16.36 
साक्षि - गोपालेर कथा कहे नित्यानन्द ।
शुनिया वैष्णव - मने बाड़िले आनन्द ॥36॥
 
 
अनुवाद
जब नित्यानंद प्रभु ने साक्षीगोपाल के समस्त कार्यों का वर्णन किया, तो सभी वैष्णवों के मन में दिव्य आनंद की वृद्धि हुई।
 
When Nityananda Prabhu narrated all the activities of Sakshi-Gopal, divine joy filled the hearts of all the Vaishnavas.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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