श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  2.16.35 
एइ - मत च लि’ चलि’ कटक आइला ।
साक्षि - गोपाल देखि’ सबे से दिन रहिला ॥35॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार चलते-चलते वे भक्त कटक नगरी पहुँचे, जहाँ वे एक दिन रुके और साक्षीगोपाल के मंदिर के दर्शन किये।
 
Thus the devotees proceeded to the city of Cuttack, where they stayed for a day and visited the temple of Sakshi-Gopal.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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