श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  2.16.34 
सेइ कथा सबार मध्ये कहे नित्यानन्द ।
शुनिया वैष्णव - मने बाड़िल आनन्द ॥34॥
 
 
अनुवाद
भगवान नित्यानंद ने पुनः यही कथा सभी भक्तों को सुनाई और कथा सुनकर उनका दिव्य आनंद बढ़ गया।
 
Lord Nityananda retold this same story to all the devotees. Hearing it again increased the devotees' transcendental joy.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd