श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  2.16.33 
ताँर ला गि’ गोपीनाथ क्षीर चुरि कैल ।
महाप्रभुर मुखे आगे ए कथा शुनिल ॥33॥
 
 
अनुवाद
यह गोपीनाथ ही थे जिन्होंने माधवेंद्र पुरी के लिए गाढ़ा दूध चुराया था। यह घटना पहले श्री चैतन्य महाप्रभु ने स्वयं कही थी।
 
It was Gopinath who stole the kheer meant for Madhavendra Puri. This incident had already been described by Sri Chaitanya Mahaprabhu himself.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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