श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  2.16.31 
क्षीर बाँ टि’ सबारे दिल प्रभु - नित्यानन्द ।
क्षीर - प्रसाद पाञा सबार बाड़िल आनन्द ॥31॥
 
 
अनुवाद
जब गाढ़ा दूध नित्यानंद प्रभु के सामने रखा गया, तो उन्होंने सभी को प्रसाद वितरित किया, और इस प्रकार सभी का दिव्य आनंद बढ़ गया।
 
Nityananda Prabhu distributed this kheer to everyone as prasad, thus increasing everyone's divine bliss.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)