श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  2.16.30 
सेइ रात्रि सब महान्त ताहा ञि रहिला ।
बार क्षीर आ नि’ आगे सेवक धरिला ॥30॥
 
 
अनुवाद
उस रात सभी महान भक्त मंदिर में ही रहे और पुजारी गाढ़े दूध के बारह बर्तन लाए, जिन्हें उन्होंने भगवान नित्यानंद प्रभु के सामने रखा।
 
That night all the great devotees stayed in the temple and the priests brought twelve pots of milk pudding and placed them in front of Nityananda Prabhu.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)