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श्री चैतन्य चरितामृत
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लीला 2: मध्य लीला
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अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा
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श्लोक 3
श्लोक
2.16.3
प्रभुर हइल इच्छा याइते वृन्दावन ।
शुनिया प्रतापरुद्र हइला विमन ॥3॥
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने वृन्दावन जाने का निर्णय लिया और यह समाचार सुनकर महाराज प्रतापरुद्र बहुत उदास हो गये।
When Sri Chaitanya Mahaprabhu decided to go to Vrindavan, Maharaja Prataparudra became very sad on hearing this news.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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