श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 282
 
 
श्लोक  2.16.282 
एइ आगे आइला, प्रभु, वर्षार चारि मास ।
एइ चारि मास कर नीलाचले वास ॥282॥
 
 
अनुवाद
इस अवसर का लाभ उठाकर गदाधर पंडित ने कहा, "अभी वर्षा ऋतु के चार महीने शुरू हुए हैं। इसलिए आपको अगले चार महीने जगन्नाथपुरी में बिताने चाहिए।"
 
Seizing this opportunity, Gadadhara Pandit said, "The Chaturmasya has now begun. Therefore, you should spend the next four months in Jagannath Puri."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)