श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 280
 
 
श्लोक  2.16.280 
तुमि याहाँ - याहाँ रह, ताहाँ ‘वृन्दावन’ ।
ताहाँ यमुना, गङ्गा, सर्व - तीर्थ - गण ॥280॥
 
 
अनुवाद
गदाधर पंडित ने कहा, "आप जहां रहते हैं, वह वृंदावन है, साथ ही यमुना नदी, गंगा नदी और अन्य सभी तीर्थ स्थान हैं।
 
Gadadhara Pandit said, “Wherever you stay, there is Vrindavan and there are the rivers Yamuna, Ganga and other pilgrimage places.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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