श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 271
 
 
श्लोक  2.16.271 
माधवेन्द्र - पुरी तथा गेला ‘एकेश्वरे’ ।
दुग्ध - दान - च्छले कृष्ण साक्षात्दल ताँरे ॥271॥
 
 
अनुवाद
“माधवेन्द्र पुरी अकेले वृन्दावन गए और कृष्ण ने उन्हें दूध पिलाने के बहाने उनसे भेंट की।
 
“Madhavendra Puri went to Vrindavan alone and Krishna appeared before him on the pretext of giving him milk.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)