श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 261
 
 
श्लोक  2.16.261 
दुई भाइ - भक्त - राज, कृष्ण - कृपा - पात्र ।
व्यवहारे - राज - मन्त्री हय राज - पात्र ॥261॥
 
 
अनुवाद
“ये दोनों भाई महान भक्त हैं और कृष्ण की कृपा के पात्र हैं, लेकिन अपने सामान्य व्यवहार में वे सरकारी अधिकारी, राजा के मंत्री हैं।
 
"These two brothers are great devotees and worthy recipients of Krishna's grace. But they are simply government officials—ministers of the king."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)