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श्लोक 257
श्लोक
2.16.257
एत मते करि’ कैलुँ गौड़ेरे गमन ।
सहस्त्रेक सङ्गे हैल निज - भक्त - गण ॥257॥
अनुवाद
इस प्रकार मैं बंगाल चला गया, किन्तु हजारों भक्त मेरे पीछे चलने लगे।
“That's how I went to Bengal, but thousands of devotees followed me.”
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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