vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 2: मध्य लीला
»
अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा
»
श्लोक 256
श्लोक
2.16.256
‘वृन्दावन याब आमि गौड़ - देश दिया ।
निज - मातार, गङ्गार चरण देखिया ॥256॥
अनुवाद
“अपनी माँ और गंगा नदी के दर्शन के लिए बंगाल के रास्ते वृन्दावन जाने का निर्णय मेरा था।
“I had resolved to go to Vrindavan via Bengal only to see my mother and the river Ganga.”
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×