श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 256
 
 
श्लोक  2.16.256 
‘वृन्दावन याब आमि गौड़ - देश दिया ।
निज - मातार, गङ्गार चरण देखिया ॥256॥
 
 
अनुवाद
“अपनी माँ और गंगा नदी के दर्शन के लिए बंगाल के रास्ते वृन्दावन जाने का निर्णय मेरा था।
 
“I had resolved to go to Vrindavan via Bengal only to see my mother and the river Ganga.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)