श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 249
 
 
श्लोक  2.16.249 
मातार चरणे ध रि’ बहु विनय करिल ।
वृन्दावन याइते ताँर आज्ञा लइल ॥249॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने अपनी माता के चरण पकड़ कर अत्यंत विनम्रतापूर्वक उनसे अनुमति मांगी। इस प्रकार उन्होंने उन्हें वृंदावन जाने की अनुमति दे दी।
 
Mahaprabhu humbly sought permission from his mother, who granted him permission to go to Vrindavan.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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