श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 242
 
 
श्लोक  2.16.242 
एत क हि’ महाप्रभु ताँरे विदाय दिल ।
घरे आ सि’ महाप्रभुर शिक्षा आचरिल ॥242॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार श्री चैतन्य महाप्रभु ने रघुनाथदास को विदा किया और वे घर लौट आये तथा उन्होंने ठीक वैसा ही किया जैसा भगवान ने उन्हें बताया था।
 
Thus Sri Chaitanya Mahaprabhu bid Raghunatha Das farewell. He returned to his home and began to work according to the method prescribed by Mahaprabhu.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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