लौकिकी वैदिकी वाँपि या क्रिया क्रियते मुने
हरि-सेवानुकुलेवा सा कार्य भक्तिम इछता
कोई भक्त एक सामान्य इंसान की तरह व्यवहार कर सकता है या वैदिक आज्ञाओं का सख्ती से पालन करने वाले के रूप में भी। इन दोनों ही स्थितियों में, वह जो भी कार्य करता है वह भक्ति-भाव को विकसित करने के लिए अनुकूल होता है क्योंकि वह कृष्ण-चेतना में होता है।
