श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  2.16.24 
आचार्य रत्न - सड़े चले ताँहार गृहिणी ।
ताँहार प्रेमेर कथा कहिते ना जानि ॥24॥
 
 
अनुवाद
चन्द्रशेखर की पत्नी [आचार्यरत्न] भी गईं। मैं चन्द्रशेखर के भगवान के प्रति प्रेम की महानता का वर्णन नहीं कर सकता।
 
Chandrashekhar's (Acharyaratna) wife also went. It is beyond my capacity to describe the magnitude of Chandrashekhar's love for Mahaprabhu.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)