श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 238
 
 
श्लोक  2.16.238 
मकर् ट - वैराग्य ना कर लोक देखा ञा ।
यथा - योग्य विषय भुञ्ज’ अनासक्त ह ञा ॥238॥
 
 
अनुवाद
"तुम्हें दिखावटी भक्त नहीं बनाना चाहिए और न ही मिथ्या संन्यासी बनना चाहिए। फिलहाल, भौतिक संसार का उचित ढंग से आनंद लो और उसमें आसक्त मत होओ।"
 
"Do not become a superficial devotee or a false ascetic. For now, enjoy the material world in the appropriate manner, but do not become attached to it."
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd