श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 222
 
 
श्लोक  2.16.222 
सेइ गोवर्धनेर पुत्र - रघुनाथ दास ।
बाल्य - काल हैते तेंहो विषये उदास ॥222॥
 
 
अनुवाद
रघुनाथ दास गोवर्धन मजूमदार के पुत्र थे। बचपन से ही उन्हें भौतिक सुखों में रुचि नहीं थी।
 
Raghunath Das was the son of Govardhan Majumdar. From childhood, he was detached from material pleasures.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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