श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 221
 
 
श्लोक  2.16.221 
मिश्र - पुरन्दरेर पूर्वे कर्याछेन सेवने ।
अतएव प्रभु भाल जाने दुइ - जने ॥221॥
 
 
अनुवाद
इन दोनों भाइयों ने पहले श्री चैतन्य महाप्रभु के पिता मिश्र पुरंदर की बहुत सेवा की थी। इस कारण भगवान उन्हें अच्छी तरह जानते थे।
 
These two brothers had previously served Sri Chaitanya Mahaprabhu's father, Mishra Purandara, extensively. Therefore, Mahaprabhu knew them well.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)