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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 219
 
 
श्लोक  2.16.219 
नदीया - वासी, ब्राह्मणेर उपजीव्य - प्राय ।
अर्थ, भूमि, ग्राम दिया करेन सहाय ॥219॥
 
 
अनुवाद
व्यावहारिक रूप से नादिया में रहने वाले सभी ब्राह्मण हिरण्य और गोवर्धन के दान पर निर्भर थे, जिन्होंने उन्हें धन, भूमि और गांव दिए थे।
 
Almost all the Brahmins living in Nadia were dependent on the donations of Hiranya and Govardhan, because they gave them money, land and villages.
तात्पर्य
यद्यपि श्री चैतन्य महाप्रभु के समय में नवद्वीप बहुत संपन्न और जनसंख्या वाला था, लेकिन लगभग सभी ब्राह्मण हीरण्य और गोवर्धन के दान पर निर्भर थे। क्योंकि भाइयों ने ब्राह्मणों का बहुत सम्मान किया, इसलिए उन्होंने बहुत उदारतापूर्वक उन्हें धन दिया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)