श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 216
 
 
श्लोक  2.16.216 
पुनरपि प्रभु यदि ‘शान्तिपुर’ आइला ।
रघुनाथ - दास आ सि’ प्रभुरे मिलिला ॥216॥
 
 
अनुवाद
जब श्री चैतन्य महाप्रभु शांतिपुरा लौटे, तो रघुनाथ दास उनसे मिलने आये।
 
When Sri Chaitanya Mahaprabhu returned to Shantipur, Raghunath Das came to meet him.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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