श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 207
 
 
श्लोक  2.16.207 
‘वाचस्पति - गृहे’ प्रभु येमते रहिला ।
लोक - भिड़ भये यैछे ‘कुलिया’ आइला ॥207॥
 
 
अनुवाद
भगवान कुछ समय तक विद्यावाचस्पति के घर पर रहे, किन्तु फिर, क्योंकि वहाँ बहुत भीड़ थी, वे कुलिया चले गए।
 
Mahaprabhu stayed at Vidyavachaspati's house for some time, but there was a lot of crowd there, so he went to Kuliya.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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