ताँरे विदाय दिल प्रभु सेइ ग्राम हैते ।
से - काले ताँर प्रेम - चेष्टा ना पारि वर्णिते ॥200॥
Warning: Undefined array key 1 in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 93
Deprecated: nl2br(): Passing null to parameter #1 ($string) of type string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 97
अनुवाद
अंत में श्री चैतन्य महाप्रभु ने राज्यपाल को विदाई दी। राज्यपाल के अतीन्द्रिय प्रेम का वर्णन नहीं किया जा सकता।
Finally, Sri Chaitanya Mahaprabhu also bid farewell to the Governor. The Governor's affection is beyond description.
तात्पर्य
श्री चैतन्य महाप्रभु ने पिछल्डा में मुस्लिम गवर्नर से विदाई ली। कृष्णदास कविराज गोस्वामी ने कहा कि श्री चैतन्य महाप्रभु से अलग होने के कारण राज्यपाल ने परमानंद प्रेम के लक्षणों का अनुभव किया। आशीष, वे कहते हैं, अवर्णनीय हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥