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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 199
 
 
श्लोक  2.16.199 
‘मन्त्रेश्वर’ - दुष्ट - नदे पार कराइल ।
‘पिछल्दा’ पर्यन्त सेइ यवन आइल ॥199॥
 
 
अनुवाद
मुस्लिम शासक श्री चैतन्य महाप्रभु के साथ मंत्रेश्वर से गुज़रा। यह स्थान समुद्री डाकुओं के कारण बहुत खतरनाक था। वह भगवान को मंत्रेश्वर के पास स्थित पिछलदा नामक स्थान पर ले गया।
 
The Muslim governor accompanied Sri Chaitanya Mahaprabhu as far as Mantresvara. This place was extremely dangerous due to bandits. He took Mahaprabhu to Pichhalda, a place near Mantresvara.
तात्पर्य
वर्तमान डायमंड हार्बर के निकट गंगा का अत्यधिक चौड़ा मुँह मंत्रेश्वर कहलाता था। गंगा के माध्यम से, नौका रूप-नारायण नदी में प्रवेश कर पिचाळदा गाँव पहुँची। पिचाळदा और मंत्रेश्वर एक-दूसरे के समान ही स्थित हैं। मंत्रेश्वर से निकलने के पश्चात, मुस्लिम गवर्नर ने प्रभु के साथ पिचाळदा तक का सफ़र किया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)