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श्री चैतन्य चरितामृत
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श्लोक 18
श्लोक
2.16.18
खण्ड - वासी नरहरि, श्री - रघुनन्दन ।
सर्व - भक्त चले, तार के करे गणन ॥18॥
अनुवाद
खाण्डा ग्राम के नरहरि और श्री रघुनन्दन तथा अन्य अनेक भक्त भी चले गये। उनकी गिनती कौन कर सकता है?
Narahari and Sri Raghunandan, residents of Khandagram, and many other devotees also left. Who can count them?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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