श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 175
 
 
श्लोक  2.16.175 
आपने महाप्रभु ताँर मन फिराइल ।
दर्शन - स्मरणे याँर जगत्तारिल ॥175॥
 
 
अनुवाद
"यह अवश्य ही श्री चैतन्य महाप्रभु ही होंगे जिन्होंने मुसलमानों का मन बदला है। उनकी उपस्थिति और उनके स्मरण मात्र से ही सारा संसार मुक्त हो जाता है।"
 
"Sri Chaitanya Mahaprabhu himself must have changed this Muslim's heart. His mere presence and remembrance of him is enough to bring salvation to the entire world."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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