श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 166
 
 
श्लोक  2.16.166 
सेइ सब लोक हय बाउलेर प्राय ।
‘कृष्ण’ कहि’ नाचे, कान्दे, गड़ागड़ि याय ॥166॥
 
 
अनुवाद
"ये सभी लोग पागलों जैसे हो जाते हैं। वे बस कृष्ण का पवित्र नाम जपते हैं और नाचते हैं। कभी-कभी तो वे रोते भी हैं और ज़मीन पर लोटते भी हैं।
 
All these people become like madmen. They simply chant the holy name of Krishna and dance.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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