एइ - मत च लि’ प्रभु ‘रेमुणा’ आइला ।
तथा हैते रामानन्द - राये विदाय दिला ॥153॥
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु अंततः रेमुना पहुंचे, जहां उन्होंने श्री रामानंद राय को विदाई दी।
Finally, Sri Chaitanya Mahaprabhu reached Remuna, from where he also bid farewell to Sri Ramanand Rai.
तात्पर्य
मध्य-लीला के प्रथम परिच्छेद श्लोक 149 में कहा गया कि भद्रक से रामानंद राय को विदा किया गया। श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर कहते हैं कि उन दिनों रेमुणा नामक स्थल में भद्रक भी सम्मिलित था।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥