श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 136
 
 
श्लोक  2.16.136 
एत ब लि’ पण्डित - गोसाञि पृथक्कलिला ।
कटक आ सि’ प्रभु ताँरे सङ्गे आनाइला ॥136॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार गदाधर पंडित गोस्वामी अकेले ही यात्रा करते रहे, लेकिन जब वे सभी कटक पहुँचे, तो श्री चैतन्य महाप्रभु ने उन्हें बुलाया, और वे भगवान के साथ चले गए।
 
In this way Gadadhara Pandita Goswami set out on the journey alone, but when they all reached Cuttack, Sri Chaitanya Mahaprabhu called him and he joined Mahaprabhu.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd