श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 133
 
 
श्लोक  2.16.133 
प्रभु कहे, - “सेवा छाड़िबे, आमाय लागे दोष ।
इँहा र हि’ सेवा कर , - आमार सन्तोष” ॥133॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने तब कहा, "यदि तुम उनकी सेवा छोड़ दोगे, तो यह मेरा दोष होगा। बेहतर होगा कि तुम यहीं रहो और सेवा करो। इससे मुझे संतुष्टि मिलेगी।"
 
Then Sri Chaitanya Mahaprabhu said, “If you stop serving him, it will be my fault.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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