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श्लोक 100
श्लोक
2.16.100
‘कटके’ आसिया कैल ‘गोपाल’ दरशन ।
स्वप्नेश्वर - विप्र कैल प्रभुर निमन्त्रण ॥100॥
अनुवाद
कटक नगरी में पहुँचकर उन्होंने गोपाल मंदिर देखा और वहाँ स्वप्नेश्वर नामक एक ब्राह्मण ने भगवान को भोजन के लिए आमंत्रित किया।
Upon reaching Cuttack, he visited the Gopal Temple, where a Brahmin named Swapneshwar invited him for a meal.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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