श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 15: महाप्रभु द्वारा सार्वभौम भट्टाचार्य के घर पर प्रसाद स्वीकार करना  »  श्लोक 96
 
 
श्लोक  2.15.96 
इहार घरेर आय - व्यय सब - तोमार स्थाने ।
‘सर खे ल’ हञा तुमि करिह समाधाने ॥96॥
 
 
अनुवाद
कृपया वासुदेव दत्त के पारिवारिक मामलों का ध्यान रखें। उनके प्रबंधक बनें और उचित समायोजन करें।
 
"Please look into Vasudev Dutt's family affairs. Be his administrator and make proper arrangements.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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