श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 15: महाप्रभु द्वारा सार्वभौम भट्टाचार्य के घर पर प्रसाद स्वीकार करना  »  श्लोक 81
 
 
श्लोक  2.15.81 
द्वारेर उपर भिते तेंहो हात दिल ।
सेइ हाते फल छुडिल, पण्डित देखिल ॥81॥
 
 
अनुवाद
“राघव पंडित ने तब देखा कि नौकर ने दरवाजे के ऊपर छत को छुआ और फिर उसी हाथ से नारियल को छुआ।
 
“Raghav Pandit saw that the servant had touched the ceiling above the door and touched the coconuts with the same hand.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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