श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 15: महाप्रभु द्वारा सार्वभौम भट्टाचार्य के घर पर प्रसाद स्वीकार करना  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  2.15.76 
जल - शून्य फल देखि’ पण्डित - हरषित ।
फल भाङ्गि’ शस्ये करे सत्पात्र पूरित ॥76॥
 
 
अनुवाद
जब राघव पंडित देखते हैं कि नारियलों का रस पी लिया गया है, तो वे बहुत प्रसन्न होते हैं। फिर वे नारियल तोड़ते हैं, उनका गूदा निकालते हैं और उसे दूसरी थाली में रख देते हैं।
 
"When Raghava Pandit sees that the coconut water has been consumed, he is overjoyed. He then breaks open the coconut, removes the kernel, and places it on another plate.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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