श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 15: महाप्रभु द्वारा सार्वभौम भट्टाचार्य के घर पर प्रसाद स्वीकार करना  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  2.15.59 
‘के अन्न - व्यञ्जन खाइल, शून्य केने पात?।
बालगोपाल किबा खाइल सब भात ? ॥59॥
 
 
अनुवाद
"फिर वह सोचने लगी कि सारा खाना किसने खा लिया। 'थाली खाली क्यों है?' उसने सोचा, उसे शक था कि कहीं बालगोपाल ने सब खा तो नहीं लिया।
 
"Then she wondered who had eaten all the food. Why was the plate empty?" She wondered if Balagopal had eaten it.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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