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श्लोक 2.15.45  |
श्रीवास - पण्डिते प्रभु करि’ आलिङ्गन ।
कण्ठे धरि’ कहे ताँरे मधुर वचन ॥45॥ |
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| अनुवाद |
| तब श्री चैतन्य महाप्रभु ने श्रीवास पण्डित को गले लगा लिया और उनके गले में हाथ डालकर उनसे मधुर वाणी में बोलने लगे। |
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| After that, Sri Chaitanya Mahaprabhu embraced Srivas Pandit and put his arms around his neck and spoke sweet words to him. |
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