श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 15: महाप्रभु द्वारा सार्वभौम भट्टाचार्य के घर पर प्रसाद स्वीकार करना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  2.15.34 
‘काहाँ रे राव्णा’ प्रभु कहे क्रोधावेशे ।
‘जगन्माता हरे पापी, मारिमु सवंशे ॥34॥
 
 
अनुवाद
हनुमानजी के आनंद में श्री चैतन्य महाप्रभु क्रोधित होकर बोले, "वह दुष्ट रावण कहाँ है? उसने जगत जननी सीता का अपहरण कर लिया है। अब मैं उसे और उसके पूरे परिवार को मार डालूँगा।"
 
Seeing Hanuman's emotion, Sri Chaitanya Mahaprabhu became angry and said, "Where is that cunning Ravana? He has kidnapped Mother Sita. Now I will kill him and his entire family."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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