अमोघ-पण्डितं वन्दे श्री-गौरेणात्म-साक्रतम्
प्रेम-गद्गद-सान्द्राङ्गं पुलकाकुल-विग्रहम्
"मैं अमोघ पंडित को नमन करता हूँ, जिन्हें भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु ने स्वीकार किया। इस स्वीकृति के परिणामस्वरूप, वह हमेशा परमानंद प्रेम में डूबे रहते थे, और उन्होंने आवाज को रोकना और शरीर पर बालों का खड़ा होना जैसे परमानंद के लक्षण प्रकट किए।"
