श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 15: महाप्रभु द्वारा सार्वभौम भट्टाचार्य के घर पर प्रसाद स्वीकार करना  »  श्लोक 299
 
 
श्लोक  2.15.299 
सार्वभौम - घरे एइ भोजन - चरित ।
सार्वभौम - प्रेम याँहा हइला विदित ॥299॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु की लीलाओं की यही विशिष्ट विशेषताएँ हैं। इस प्रकार भगवान ने सार्वभौम भट्टाचार्य के घर भोजन किया, और इस प्रकार सार्वभौम का भगवान के प्रति प्रेम सर्वविदित हो गया।
 
These are the distinctive features of Sri Chaitanya Mahaprabhu's pastimes. Thus, Mahaprabhu ate at Sarvabhauma Bhattacharya's house, and Sarvabhauma's love for Mahaprabhu became well known.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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