श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 15: महाप्रभु द्वारा सार्वभौम भट्टाचार्य के घर पर प्रसाद स्वीकार करना  »  श्लोक 265
 
 
श्लोक  2.15.265 
पतिं च पतितं त्यजेत् ॥265॥
 
 
अनुवाद
“‘जब पति पतित हो जाए, तो उसके साथ अपना रिश्ता तोड़ देना चाहिए।’”
 
“If the husband becomes corrupt, then one should break off relations with him.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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