श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 15: महाप्रभु द्वारा सार्वभौम भट्टाचार्य के घर पर प्रसाद स्वीकार करना  »  श्लोक 257
 
 
श्लोक  2.15.257 
प्रभु कहे, - निन्दा नहे, ‘सहज’ कहिल ।
इहाते तोमार किबा अपराध हैल ? ॥257॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु ने कहा, "अमोघ ने जो कहा है वह सत्य है; अतः यह ईशनिंदा नहीं है। तुम्हारा अपराध क्या है?"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu said, "What Amogha said is correct, so it is not slander. What is your fault in this?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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