श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 15: महाप्रभु द्वारा सार्वभौम भट्टाचार्य के घर पर प्रसाद स्वीकार करना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.15.25 
अलात - चक्रेर प्राय लगुड़ फिराय ।
देखि’ सर्व - लोक - चित्ते चमत्कार पाय ॥25॥
 
 
अनुवाद
जब श्री चैतन्य महाप्रभु ने दण्ड को अग्नि की तरह गोल-गोल घुमाया, तो उसे देखने वाले सभी लोगों का हृदय विस्मित हो गया।
 
When Sri Chaitanya Mahaprabhu was rotating the stick like a fire arrow (Alatchakra), the hearts of the onlookers were astonished.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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