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श्लोक 2.15.239  |
नीलाचले भोजन तुमि कर बायान्न बार ।
एक एक भोगेर अन्न शत शत भार ॥239॥ |
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| अनुवाद |
| “आखिरकार, जगन्नाथ पुरी में आप दिन में बावन बार भोजन करते हैं, और हर बार आप प्रसाद से भरी सैकड़ों बाल्टियाँ खाते हैं। |
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| In Jagannath Puri, you eat at least 52 times a day and at each time you consume hundreds of buckets full of Prasad. |
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