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श्लोक 2.15.217  |
घृत - सिक्त परमान्न, मृत्कुण्डिका भरि’ ।
चाँपाकला - घनदुग्ध - आम्र ताहा धरि ॥217॥ |
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| अनुवाद |
| मीठे चावल को घी में मिलाकर मिट्टी के बर्तन में डाला गया और उसमें चना-कला, गाढ़ा दूध और आम मिलाया गया। |
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| Sweet rice mixed with ghee was put in an earthen pot and Champakala, Auntaya milk and mango were added to it. |
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