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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 15: महाप्रभु द्वारा सार्वभौम भट्टाचार्य के घर पर प्रसाद स्वीकार करना  »  श्लोक 204
 
 
श्लोक  2.15.204 
पाक - शालार दक्षिणे - दुइ भोगालय ।
एक - घरे शालग्रामेर भोग - सेवा हय ॥204॥
 
 
अनुवाद
रसोईघर के दक्षिण की ओर भोजन अर्पण करने के लिए दो कमरे थे, और उनमें से एक में शालग्राम नारायण को भोजन अर्पित किया जाता था।
 
To the south of the kitchen were two rooms for offering food, one of which was used to offer food to Shaligram Narayan.
तात्पर्य
वैदिक मत के अनुयायियों में शालग्राम-शिला, नारायण की विग्रह रूप में एक पत्थर के गोले के रूप में पूजा की जाती है। भारत में, हर ब्राह्मण अभी भी अपने घर में शालग्राम-शिला पूजा करते हैं। वैश्य और क्षत्रिय भी इस पूजा में संलग्न हो सकते हैं, लेकिन यह एक ब्राह्मण के घर में अनिवार्य है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)