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श्लोक 2.15.198  |
तुमिह निज - छाये आसिबे मोर घर ।
कभु सङ्गे आसिबेन स्वरूप - दामोदर ॥198॥ |
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| अनुवाद |
| “कभी आप अकेले मेरे यहाँ आएंगे, और कभी आपके साथ स्वरुप दामोदर होंगे।” |
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| “Sometimes you will come to my house alone and sometimes with Swarup Damodar.” |
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