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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 15: महाप्रभु द्वारा सार्वभौम भट्टाचार्य के घर पर प्रसाद स्वीकार करना  »  श्लोक 196
 
 
श्लोक  2.15.196 
आर अष्ट स न्यासीर भिक्षा दुइ दुइ दिवसे ।
एक एक - दिन, एक एक जने पूर्ण हइल मासे ॥196॥
 
 
अनुवाद
बाकी आठ संन्यासी दो-दो दिन के लिए निमंत्रण स्वीकार करेंगे। इस तरह पूरे महीने हर दिन के लिए कार्यक्रम होंगे।
 
"The other eight monks will accept the invitation for two days each. Thus, there will be a daily program for the entire month.
तात्पर्य
पूरे महीने में, जो तीस दिनों का होता है, चैतन्य महाप्रभु पाँच दिन सर्वभौम भट्टाचार्य के यहाँ जाते थे, परमानन्द पुरी गोस्वामी पाँच दिन जाते थे, स्वरूप दामोदर चार दिन और अन्य आठ सन्यासी दो-दो दिन जाते थे। इस तरह महीने के तीस दिन पूरे हो जाते थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)